मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

पुस्तक चर्चा

वरिष्ठ कथाकार हृदयेश के सद्यः प्रकाशित उपन्यास ‘संगत’ मे दो उपन्यास शामिल हैं - ‘सांड़’ और ‘दंडनायक’ । सांड़ उपन्यास के केन्द्र में हमारी शिक्षा व्यवस्था है । प्रस्तुत उपन्यास विस्तृत फलक पर शिक्षण जगत की अराजक और आतंकी गतिविधियों का लेखा-जोखा है । उपन्यास में यह भी चित्रित किया गया है कि बेहद सामान्य से दीखने वाले उत्पीडि़त लोगों में से कुछ ऐसे जन भी निकल आते हैं जो इस स्थिति का सक्रिय प्रतिवाद करने को उठ खड़े होते हैं । शुरू में वे अपने प्रतिरोध में अकेले होते हैं , सुबह की धूप के छितरे हुए टुकड़ों की मानिंद , लेकिन जल्द ही वे सब मिलकर गर्म धूप का सैलाब बन जाते हैं और उस सैलाब के दबाव के आगे भ्रष्ट-तंत्र व नौकरशाही को झुकना पड़ता है ।


दंडनायक उपन्यास में स्वतंत्र भारत की मानव-विरोधी व्यवस्था की चक्की में पिस गए एक ऐसे व्यक्ति की व्यथा-कथा चित्रित है जो अपने देश की आजादी के लिए फांसी पर चढ़े एक क्रांतिकारी ( शहीद रोशन सिंह) की तीसरी पीढ़ी में पैदा हुआ था । यह उपन्यास उन अनेक प्रश्नों को उठाता है जो वर्तमान जन-मानस को बराबर परेशान किए हुए हैं । क्या आज के हिन्दुस्तान की तस्वीर वही है जो क्रान्तिकारियों के दिलो-दिमाग में थी और जिसके लिए उन्होंने भरी जवानी में फांसी के फंदे को चूमा था ?


दोनों ही उपन्यासों में अलग-अलग विषय-वस्तु होकर भी मानव-विरोधी व्यवस्था से भिड़ने -जूझने का संकल्प और साथ ही उस दिशा में भरसक प्रयास किया है ।


‘संगत’ - हृदयेश
पृष्ठ - 414 मूल्य : 450/-

भावना प्रकाशन109 ए ,

पटपड़गंज , दिल्ली - 110091

वरिष्ठ कथाकार बलराम हिन्दी के उन लब्धप्रतिष्ठ कथाकारों में हैं जिहोंने पत्रकारिता के साथ अपनी सृजन क्षमता को अक्ष्क्षुण रखा है । ‘कलम हुए हाथ’ और ‘मालिक के मित्र’ जैसी महत्वपूर्ण कहानियां लिखने वाले बलराम का सद्यः प्रकाशित कहानी संग्रह है - ‘गोवा में तुम’ , जिसमें शीर्षक कहानी के अतिरिक्त सोलह अन्य कहानियां सम्मिलित हैं । संग्रह की यद्यपि सभी कहानियां पठनीय हैं , लेकिन गोवा में तुम , शुभ दिन , मालिक के मित्र , सामना , इतना खटराग , समर्पण गाथा , उनके फतवे कहानियां लेखक की चमत्कारिक भाषा , शिल्प और कथानक का उललेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करती हैं
प्रकाशक - वही

पृष्ठ- 135 , मूल्य - 150/-

9 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

धन्यवाद इस जानकारी के लिये आज आपकी कहानी देखी साहित्य अमृत मे अभी रात को पढूँगी। शुभकामनायें

सुरेश यादव ने कहा…

भाई चंदेल जी,पुस्तक चर्चा के माद्ध्यम से आप ने हृदेश जी तथा बलराम जी के नवीन सृजन से परिचय कराया आप को साधुवाद.

PRAN SHARMA ने कहा…

HRIDESH AUR BALRAM KEE SADHYA
PAKASHIT PUSKON KEE VISTRIT
JAANKAAREE DENE KE LIYE AAPKA
DHANYAWAD.KRIPYA BHAVISHYA MEIN
BHEE AESEE JANKAREE DETE RAHIYE.
SHUBH KAMNAYEN.

बलराम अग्रवाल ने कहा…

'रचना समय' का यह अंक सूचनापरक है। अच्छी किताबों की जानकारी देना भी साहित्यिक दायित्व है।

ashok andrey ने कहा…

CHANDEL BHAI AAP PUSTAKON KI SARTHAK TATH SAMIKSHATMAK CHARCHA KARKE OOLLEKHNIYA KARYA KAR RAHE HEIN BHAI HRIDESH JEE TATHA BHAI BALRAM JEE KE BAARE ME AUR OONKI SAHITAYIK GATI VIDHIYON KE BAARE ME JAANKAARI PAA KAR ACHCHHA LAGA ISS SUNDAR KARYA KE LIYE TUMHEN BADHAI DETA HOON

महावीर ने कहा…

वरिष्ठ कथाकार हृदयेश जी और बलराम जी के प्रकाशित पुस्तकों की जानकारी के लिए धन्यवाद.
महावीर शर्मा

परमजीत बाली ने कहा…

पुस्तकों की जानकारी के लिए धन्यवाद

Vijesh ने कहा…

बड़ी मुश्किल से ढूंढ कर मै आप तक पहुँच पाया हूँ यहाँ पर मौजूद सभी से में प्रारथना है कि कृपया मुझे एक पुस्तक का पता बता दे कि वहा कहाँ मिलेगी"बलराम कि श्रेष्ठ कहानियां " मैंने बहुत साल पहले इसे पढ़ा था मै आज भी इसकी कहानियों को याद करता हूँ मै आपका बहुत आभारी हूँगा

विजेश रावल ने कहा…

मै बहुत ढूंढ ढूंढ कर आप लोगों तक पहुंचा हूँ कृपया मुझे "बलराम की श्रेष्ठ कहानियां " पुस्तक का पता बता दीजिये की ये कहाँ मिलेगी मैंने बहुत साल पहले इसे पढ़ा था पहले बलराम के नाम से सर्च किया तो पता नही क्या क्या आ रहा था फिर कहानी के नाम से सर्च किया कलम हुए हाथ . वो कहानिया मेरे जेहन में अभी तक जिन्दा हैं मै आपका बहुत आभारी हूँगा